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Saturday, 21 May 2016

युवराज - कविता

युवराज - कविता


माँ के मन का मोर बनकर - बाप का सिर मौड़ बनकर। 
वंश का वंशज खड़ा है - दश का कर्णधार बनकर॥ 

माँ के मन का देव बनकर - ज़िन्दगी को जी रहा वह।
सोच रहा वह प्रत्येक क्षण है - आगे बढ़ने की चाह लिए॥

परिवार का उत्थान हो - या हो देश का उत्थान।
कुछ कर गुजरने की तमन्ना - हर समय है साथ लिए॥

दिन  हो या रात - स्वास्थ्य हो या हो बिमार।
रिश्तों के अच्छे मोती को - ढूंढ़ रहा वह तन्हा होकर॥

आरक्षण की काली अंधियारी -  देख रहा वह दूर खड़ा।
 कब आयेगी मेरी बारी? हर पल है वह चाह लिए॥

माँ के मन का मोर बनकर - बाप का सिर मौड़ बनकर।
वंश का वंशज खड़ा है - देश का कर्णधार बनकर॥

-  मेनका

Thursday, 19 May 2016

नन्ही परी - कविता

नन्ही परी - कविता


फूलों की मैं कलियाँ बनकर - माँ के मन की गुड़िया बनकर। 
इस दुनिया को देखा मैंने - पापा को पहचाना मैंने॥ 

दूर - दूर तक तन्हाई थी - दादी दर्द लिए बैठी थी। 
आस - पास के सारे बच्चे - मुझे देख कर खुश होते हैं॥ 

पापा की मैं इच्छा बनकर - दादा की प्रतीक्षा।
मम्मी की मैं रानी बेटी - दादी की हूँ परायी॥ 

फूला गाल बैठी हैं - मम्मी को कोस रही। 
दुनिया में क्यों लाई इसको - तूने मुझको दूर किया ॥ 

बड़ी हुई जब माँ की लाड़ली - अरमानो की रानी बनकर।
पापा के सपनों की रानी - अपने मन की हैं मनमानी॥

बहुत बड़ी हैं भीड़ खड़ी यह - आरक्षण की टोली बनकर।
माँ की बेटी मौन खड़ी हैं - सोच रही है तनहा होकर॥

-  मेनका

Saturday, 7 May 2016

नौसैनिक अस्पताल - कविता

नौसैनिक अस्पताल - कविता

INHS Kasturi


हमारी कस्तुरी - निराली कस्तुरी । 
प्यारी कस्तुरी - अनोखी कस्तुरी ॥ 

कस्तूरी का आँचल लहराता गगन में । 
समेटे हुए है वो कोहिनूर का हीरा॥ 
सभी के विचारों को है वो समझती। 
करती नहीं वो भेदभाव कभी भी॥

वीरों के तरह वो बिमारी से लड़ती। 
मुरझाये चमन में - बहारें वो लाती॥
अपने नामों के ऊपर खड़ा वो उतरती। 
समझती नहीं वो - दिन है या रात॥ 

हमारी कस्तूरी - निराली कस्तुरी । 
प्यारी कस्तूरी - अनोखी कस्तुरी॥ 

- मेनका

मिलिट्री मैन - कविता

मिलिट्री मैन - कविता दशक चाकरी की वीरों सा| पल-भर में क्यों अनदेख किया|| पलक झपकते दौड़ गए थे| घुटनो के बल रेंग गए थे|| भारत की माटी को हमने|...