नोटों का पतझड़ - कविता

नोटों का पतझड़ - कविता 


हरी गुलाबी नीली- पीली, 
नोटों की बरसात लगी है।
भ्रष्टाचार के नाग नथैया,
मोदीजी आये है भइया।
भ्रष्टाचार के डंक ने भइया,
हम सबको है बड़ा रुलाया।
हरी गुलाबी नीली- पीली, 
नोटों की बरसात लगी है॥

मोदीजी का खेल तो भइया,
बड़ा ही अदभूत बड़ा है न्यारा।
नोटों के इस पतझड़ में तो,
हम सबको भी लड़ना होगा।
P.M  की लड़ाई भ्रष्टों से जारी,
हमारी लड़ाई तो कतारों से जारी।
हरी गुलाबी नीली- पीली, 
नोटों की बरसात लगी है॥

- मेनका सिन्हा

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