Sunday, 12 May 2019

चारो धाम - गीत

चारो धाम - गीत




पिया हे चलु चारो धाम
बाबा केदारनाथ जगलन हे|
धनी हे कैसे चलब चारो धाम?
बाबा के विकट नगरी|
नीक-नीक भांग भोला
तोरी हम राखल सेहो
शीव के चढ़ैबइ हे
बाबा के दर्शन करबइ हे|

पिया हे चलु चारो धाम
बद्रीनाथ जगलन हे|
धनी हे कैसे चलब चारो धाम?
प्रभु के विकट डगरी|
पियरी पिताम्बर नाथ
जतन से राखल
बद्रीनाथ जी के चढ़ैबइ हे
प्रभु जी के दर्शन करबइ हे|

पिया हे चलु चारो धाम
हम गंगोत्री जयबई हे|
धनी हे कैसे चलब चारो धाम?
गंगा के विकट डगरी|
गंगा के श्रृंगार हम,
खोंइछा भरी राखल|
हम त सेहो चढ़यबई हे
हम गंगोत्री नहयबई हे|

पिया हे चलु चारो धाम
हम यमुनोत्री जयबई हे|
धनी हे कैसे चलब चारो धाम?
यमुनोत्री विकट डगरी
यमुनाजी के वस्त्र हम,
साजी के राखल
हम त चुंदरी चढ़यबई हे
हम यमुनोत्री नहयबई हे|


- मेनका

Wednesday, 24 April 2019

आह की आहट - कविता

आह की आहट - कविता


ध्यान रहे यह, पल-पल क्षण-क्षण|
आहें न ले, बेगुनाह की||
आह की आहार तुम्हारी|
नाकाम कोशिश, साज़िश की||
फूटती जब, दर्द दिल का|
रूबरू, बेपर्द किस्सा||
जागीर की, जंजीर से तू|
कैद, कर सकते नहीं||
आह का आलम कभी|
सोने न देगी, चैन से||
शान की, शोहरत तुम्हारी|
लगा न दे, बेजान टीका||
साँस की, सरेआम शबनम|
नीलम न हो, बाजार में||
आह की, सूरत तुम्ह|
जीने न देगी, चैन से||
आहें कभी, मरती नहीं|
ज़िंदा कभी, जलती नहीं||
दवा न ले, बीमार की|
दवा न खा बीमार की||
देश हमारा डिजिटल है |
पर कार्ड हमारा कोने में||
हम जब चाहे जैसे चाहे|
हर कोने में जाकर वास करे||

- मेनका

Monday, 8 April 2019

स्वच्छ भारत - कविता

स्वच्छ भारत - कविता




स्वच्छता के बीज बापू|
लगा गए अरमान से||
आज हमारे देश भक्त|
लहलहा दिए बड़े लाड से||
स्वच्छता के वृक्ष विराने|
में खड़ा खिल-खिला रहा||
स्वच्छ भारत शान है|
शालीनता मिसाल है||
सुन्दर मनोहर स्वच्छता के|
गीत भारत गा रहा||

- मेनका

Wednesday, 20 March 2019

वीरता का अभिनन्दन - कविता

वीरता का अभिनन्दन - कविता


 आ रहा है लाल माँ का,
लाज है वो देश का|
अभी अभिनन्दन तुम्हारा,
देशवापसी कर रहा|
माँ भारती का ताज है तू,
दे रहा संदेश है|
गुरुर है तू देश का और,
शान है तू टीम का|
अदम्य साहस वीर है,
कायर नहीं वो वीर है|
माँ भारती के लाल है,
भक्त अपने देश का|
मर्यादा मातृभूमि की,
खोते नहीं वो वीर है|
आ रहा है लाल माँ का,
लाज है वो देश का|

- मेनका

Saturday, 16 February 2019

वीणा-वादिनी

वीणा-वादिनी


सुअवसर आज है सुन्दर,
जो सरस्वती माँ पधारी  है|
मनाती थी बहुत दिन से,
वही फिर भाग्य से पाई|
कनक के द्दाल में भर-भर,
मणी-मुक्ता नहीं लाई|
फूलो का हार चुन-चुनकर,
माँ अर्चना को आई हूँ|
तेरा सान्निध्य पाकर माँ,
नयन में नीर आते हैं|
कनक का दान मत दे माँ,
मुझे वाणी की अभिलाषा|
तुम्हारा प्यार पाकर माँ.
मैं अनुराग लाई हूँ|
तुम स्वीकार कर लेना,
यह पुष्पाञ्जलि मेरी|
नवाती शीश चरणों में,
धरोहर आज पाई हूँ|

- मेनका

Wednesday, 23 January 2019

लम्हों के कुछ मीठे पल - कविता

लम्हों के कुछ मीठे पल - कविता


शिशिर सुबह की मधुबेला हो,
प्रभु मिलान अमृत वेला|
खिलते कलियों का मंज़र हो,
उठते लहरों का समंदर|
ओस के कुछ बूंद है,
वो रात के अवशेष हैं|
महकते फूलों की हो खुशबु,
मंडराते भौरों का नज़ारा|
नाचते जब मोर हैं,
झंकृत हुआ मन मोर हैं|
बागो का हो वादियाँ और,
चुस्कियाँ हो चाय की|
सुबह सूर्य की रौशनी हो,
नत मस्तक सब ख्वाहिशें है|
बीते लम्हों के मीठे पल,
चहकते चिड़ियों का कलरव|
  शिशिर सुबह की मधुबेला हो,
प्रभु मिलान अमृत वेला||

- मेनका

Wednesday, 31 October 2018

छठ गीत

छठ गीत



बहुत दिवश पर कइली दीनानाथ व्रत तोहार|
दिहब  आशीष दिनकर बाबा दिहब मन-चित लगाय
बड़ा अनुरागे हम पकइली दीनानाथ भोग तोहार
करब कृपा दिनकर बाबा हम करजोरी ठाढ़|
बड़ा रे जतन से सजइली दीनानाथ हथीया तोहार
करु अब स्वीकार दिनकर बाबा सुनु अरजी हमार|

बहुत दिवश पर कइली दीनानाथ व्रत तोहार|
दिऊ न पुराय दिनकर बाबा अब आशा हमार|
बड़ा अनुरागे हम खनइली दीनानाथ घाट तोहार|
होऊ न सहाय दिनकर बाबा सुनु अरजी हमार|
बड़ा रे जतन से सजइली दीनानाथ अरग तोहार
करब कृपा दिनकर बाबा हम करजोरी ठाढ़|
बड़ा अनुरागे हम सजइली दीनानाथ डलबा तोहार|
लिऊ अब अरग दिनकर बाबा लिऊ मन-चित लगाय|
करब क्षमा छठी माता गलती अवगुण माफ़| 

छठ पूजा - गीत

छठ पूजा - गीत




आदित्य देव जी सुनु आहाँ अरजी हमार|
पहिले मंगइछी देव। ..... २ भाई भतीजा,
दिनकर बाबा यो भटकल नइहर दिअऊ न सजाय|
दोसरे मंगइछी देव सर के सेंदुरबा दिनकर
बाबा यो सुहागिन पद दिअऊ बरदान|
आदित्य देव यो सुनु आहाँ अरजी हमार|
तेसरे मंगइछी देव वंश के वैभव दिनकर
बाबा यो ऊजरल वैभव दिअऊ न बसाय|
आदित्य देव जी सुनु आहाँ अरजी हमार|
चौथा मंगइछी देव अन-धन लक्ष्मी,
दिनकर बाबा यो गरीब पद दिअऊ न छोड़ाय|
आदित्य देव जी सुनु आहाँ अरजी हमार||

Tuesday, 16 October 2018

माँ से अर्ज - गीत

माँ से अर्ज - गीत





मइया अनहोनी पर दीअऊ तनी ध्यान यो
प्राणी सब बेहाल यो न|
आहाँ के मंदिर हम गैलौं, आहाँ के शेर के समझाइलौं
मइया अनहोनी पर दीअऊ तनी ध्यान यो
प्राणी सब बेहाल यो न|
आहाँ के पाठ हम कैलौं, ब्रत सेहो हम कैलौं
मइया अनहोनी पर दीअऊ तनी ध्यान यो
प्राणी सब बेहाल यो न|
हम सब चूक कहाँ कैलौं? भूल सेहो हम कैलौं
मइया क्षमा करू सब भूल-चूक हमार यो
प्राणी सब बेहाल यो न|

- मेनका सिन्हा

माँ की अद्भुत क्षबि - कविता

माँ की अद्भुत क्षबि - कविता




महा माया के महिमा कोना हम कहूं?
महा काली के कीर्ति कोना हम कहूं?
हम सपना में देखलऊँ अद्भत क्षबि|
माँ के लाली चुंदरिया में सोना जड़ी|
माँ के प्यारी पैजनिया में घुंघरू लगी|
महामाया के महिमा कोना हम कहूं?
महा काली के कीर्ति कोना हम कहूं?
माँ के सिरो सिन्दुरबा में खुशबु भरी|
माँ के लाल महाबार फूलों से भरी|
महा माया के महिमा कोना हम कहूं?
महा काली के कीर्ति कोना हम कहूं?

- मेनका सिन्हा

Tuesday, 11 September 2018

मानव धर्म - कविता

मानव धर्म - कविता


मानवता है धर्म हमारा|
रंग भये बहुतेरे||
इंद्रधनुषी वस्त्र हमारे|
जीव भये बहुतेरे||
आँखों में सुरमा है सुन्दर|
लाल रंग की बिंदी||
केशरिया है तीलक विराजे|
सफ़ेद रंग की धोती||

मानवता है धर्म हमारा|
रंग भये बहुतेरे||
मानवता ममता का आँगन|
निर्मल मन अति भावन||
सजा रहे घर आँगन सबका|
शुद्ध समर्पण सा मन||
बुरी आत्मा बुरा आचरण|
छुपा हुआ अधर्मी||

ममता राग को वह नोचे|
बना फिरे सत्संगी||
अंग विहिन वह सेंसहीन है|
मंजिल है उत्पाती||
तामस तन करुनाविहीन है|
चोला है चित पंचल||
मानवता है धर्म हमारा|
रंग भये बहुतेरे||

- मेनका

चारो धाम - गीत

चारो धाम - गीत पिया हे चलु चारो धाम बाबा केदारनाथ जगलन हे| धनी हे कैसे चलब चारो धाम? बाबा के विकट नगरी| नीक-नीक भांग भोला ...