Sunday, 17 September 2017

देश का धरोहर - कविता

देश का धरोहर - कविता


नाम है अर्जन तुम्हारा,
अर्जित किया सब शान को|
जम रहा वह मेडलों में,
सज रहा इतिहास मे|
धरती माँ का लाल है वो,
सज रहा युनिफौर्म में|
रक्षको की शान है वो,

मान है मातृत्व का|
इतिहास का गौरव संभाले,
दे रहा संदेश वो||

नाम है अर्जन तुम्हारा,
अर्जित किया सब शान को|
संभालना है तो संभालो,
देश के हर शान को|
अपने सब उन ताकतों से,
देश की सब लाज रखना|
मौन है वो माँ हमारी,
सुन रही आवाज़ को|
मत करो मैला-कुचैला,
देश के पहचान को||

नाम है अर्जन तुम्हारा,
अर्जित किया सब शान को|
सीखना है सीख ले तू,
ये कपूतो जेल में|
जेल का ज़ंजीर खाली,
 दान कर आतंक को|
 नाम है भगवान का,
और काम है शैतान का|
कार बंगला फ़ोन बाकी,
सब सजा उस शान में||

- मेनका

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