Sunday, 15 October 2017

मन मोहन सांवरिया - कविता

मन मोहन सांवरिया - कविता


कहाँ जा छूपे हो मेरे वंशी वजैया|
वंशी वजैया मेरे कृष्ण कन्हैया||
दरस दिखा जा मेरे नाग नथैया|
आ जाओ मेरे प्रभू यशोदा दुलारे||
राक्षस का माखन प्रभू ग्वाला खिवैया|
अब न सताओ प्रभू दरस दिखाजा||
मेरे मन मोहन प्रभू रास रचैया|


कहाँ जा छूपे हो मेरे वंशी वजैया|
मेरी दुर्दशा प्रभू आकर मिटा दे||
मेरी सब बिगड़ी को आकर सुधारो|
रथ के हँकैया प्रभू जल्दी से आ जा||
लाज बचैया प्रभू चीर बढैया|
बिगड़ी बनैया प्रभू मुक्ति दिलैया||
देवकी नन्दन प्रभू नंद के प्यारे|
कहाँ जा छुपे हो प्रभु कृष्ण कन्हैया||

- मेनका

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