Saturday, 26 March 2016

Chhath ke Geet - 82 - सुतल रहली हो दीनानाथ मुनहर घर

सुतल रहली हो दीनानाथ मुनहर घर।
सपना जे देखली हो दीनानाथ तोहरो एवरुर।
झूठे तोहर बोलीया गे बाझीन झूठे तोहर बात।
झुनकी खरऊँआ हो दीनानाथ बाझीन द्वार।
सच्चे तोहर बोलीया गे बाझीन सच्चे तोहर बात।
जे कुछ मेंगबे गे बाझीन से कुछ मांग।
अन-अन लक्ष्मी हो दीनानाथ दिहली बहुत।
एकेगो पुत्र बीनु हे सुन संसार।
देबे केत देवऊ गे बाझीन गजाघर अइसन पुत्र।
गर्व जानी करबे गे बाझीन सेहो लेबऊ छीन।।