Friday, 26 May 2017

दशहरा की अधिष्ठात्री देवी - कविता

दशहरा की अधिष्ठात्री देवी - कविता


मैंने सुना है माँ दुष्टों की दुश्मन|
भारत के दुश्मन को पल में मिटा जा||
फौजों के जीवन है तेरे सहारे|
जीवन की डोर माँ तेरे हवाले||
भारत की धरती को फिर से बचा ले|
में तो आई हूँ माँ तेरे शरण में||

मैंने सुना है दुर्गे दुष्टों की दुश्मन|
भारत के दुश्मन को पल में मिटा जा||
फौजों के परिवार है तेरे सहारे|
तेरी सूरत माँ है मुझको लुभाये||
तेरा ही ध्यान माँ मुझको है भाये|
तेरी ही याद माँ मुझको सताये||

मैंने सुना है अम्बे दुष्टों की दुश्मन|
भारत के दुश्मन को पल में मिटा जा||
फौजों के परिवार है तेरे सहारे|
तेरी कृपा बिन माँ में जी सकू न||
छल और कपट न हो मेरे जीवन में|
झूट की छाया पड़े नहीं मुझ पर||

मैंने सुना है माँ दुष्टों की दुश्मन|
भारत के दुश्मन को पल में मिटा जा||
फौजों के जीवन है तेरे सहारे|
तेरा ही अटूट भक्त भारत के मालिक||
भारत की लाज माँ तेरे चरण में|
क्षण में संहार को भारत का दुश्मन||

- मेनका

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