Saturday, 7 May 2016

नौसैनिक अस्पताल - कविता

नौसैनिक अस्पताल - कविता

INHS Kasturi


हमारी कस्तुरी - निराली कस्तुरी । 
प्यारी कस्तुरी - अनोखी कस्तुरी ॥ 

कस्तूरी का आँचल लहराता गगन में । 
समेटे हुए है वो कोहिनूर का हीरा॥ 
सभी के विचारों को है वो समझती। 
करती नहीं वो भेदभाव कभी भी॥

वीरों के तरह वो बिमारी से लड़ती। 
मुरझाये चमन में - बहारें वो लाती॥
अपने नामों के ऊपर खड़ा वो उतरती। 
समझती नहीं वो - दिन है या रात॥ 

हमारी कस्तूरी - निराली कस्तुरी । 
प्यारी कस्तूरी - अनोखी कस्तुरी॥ 

- मेनका

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